राजधानी पटना से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित नवादा जिले के लोग रोजाना बस सेवा की कमी से जूझ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर उन छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ रहा है जिन्हें प्रतिदिन या सप्ताह में कई बार पटना आना-जाना पड़ता है।
समय की जानकारी नहीं, बसें भी कम
गांधी मैदान बस स्टैंड, जो पटना का प्रमुख बस अड्डा है, पर बसों के समय की कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। न तो यहां बसों के नंबर और टाइमिंग की सूची लगी होती है, और न ही यात्रियों को मार्गदर्शन देने के लिए कोई स्टाफ मौजूद रहता है। बस कब आएगी, यह यात्रियों के अंदाज़े और इंतज़ार पर निर्भर करता है।
भीड़ और थकान से पढ़ाई और काम पर असर
सुबह के समय बसें बेहद भीड़भाड़ वाली होती हैं। अक्सर यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है, जो छात्रों के लिए थकान और एकाग्रता की कमी का कारण बनती है।
•छात्रों को क्लास, कोचिंग या परीक्षा में समय पर पहुंचने में दिक्कत होती है, और लंबी खड़े होकर यात्रा के बाद उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है।
•नौकरीपेशा लोगों के लिए यह देरी सीधे कामकाजी जीवन पर असर डालती है। कई लोग ऑफिस लेट पहुंचते हैं, जिससे काम और इमेज दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
त्योहार और परीक्षा सीजन में हालात बदतर
त्योहारों और प्रतियोगी परीक्षाओं के समय यह समस्या चरम पर होती है। बसों की संख्या और भी कम हो जाती है, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई छात्र परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचते हैं या यात्रा की थकान से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। वहीं, नौकरीपेशा लोग मजबूरी में छुट्टी लेने पर विवश हो जाते हैं।
नई बसें, लेकिन सड़क पर नहीं
सूत्रों के अनुसार, नवादा बस स्टैंड में हाल ही में 6 नई बसें खड़ी की गई हैं, लेकिन सरकारी स्वीकृति न मिलने के कारण वे अब तक परिचालन में नहीं आईं। रजौली–बख्तियारपुर फोर लेन बनने से यात्रा का समय घटा है, लेकिन बसों की कमी ने इस सुविधा के लाभ को कम कर दिया है।
यात्रियों की मांग
छात्रों और नौकरीपेशा लोगों ने सरकार से निम्न मांगें की हैं —
1.पटना–नवादा रूट पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
2.बस स्टैंड पर इलेक्ट्रॉनिक सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि बसों के समय और नंबर की जानकारी आसानी से मिल सके।
3.त्योहारों और परीक्षा सीजन में अतिरिक्त बसों का संचालन हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि बस सेवा में सुधार से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि छात्रों और नौकरीपेशा लोगों की उत्पादकता और प्रदर्शन में भी सुधार होगा।