दिल्ली सरकार ने राजधानी के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 5 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने घोषणा की कि सितंबर महीने से दिल्ली के 50 सरकारी स्कूलों के शिक्षक IIT मंडी (हिमाचल प्रदेश) और IIT गांधीनगर (गुजरात) में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस विशेष प्रशिक्षण में वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, योग, भारतीय दर्शन, कला और विज्ञान जैसे पारंपरिक विषयों का समावेश होगा।
सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षकों को भारत की हजारों वर्षों पुरानी समृद्ध परंपराओं से जोड़ा जाए ताकि वे इन विषयों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ एकीकृत कर सकें। पहले चरण में चुने गए 50 शिक्षकों को 5–7 दिन की प्रशिक्षण कार्यशाला में भेजा जाएगा। ये सभी शिक्षक 5–5 के समूह में विभाजित होकर IIT के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण लेंगे।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि “भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के केंद्र में लाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल” है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अंतर्गत भी आती है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को स्कूली शिक्षा में स्थान देने की बात कही गई है।
IIT मंडी और IIT गांधीनगर पहले से ही “Indian Knowledge Systems (IKS)” पर रिसर्च कर रहे हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम भी UGC और IKS डिवीजन की सलाह से तैयार किया गया है। आगे चलकर सरकार की योजना निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी इस कार्यक्रम में शामिल करने की है।
दिल्ली सरकार का यह कदम आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बनाने की दिशा में प्रशंसनीय माना जा रहा है। यह पहल भविष्य में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करने में सहायक होगी।