विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने उच्च शिक्षा को लेकर अहम घोषणा की है। आयोग ने साफ किया है कि अब देशभर में हेल्थ और साइंस से जुड़े कोर्सेज को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि मेडिकल, नर्सिंग, फिजियोथेरपी, फार्मेसी और अन्य हेल्थ-साइंस संबंधी पाठ्यक्रमों को किसी भी परिस्थिति में ऑनलाइन नहीं चलाया जाएगा।
यूजीसी का मानना है कि इन विषयों की पढ़ाई केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर आधारित नहीं होती, बल्कि इसमें प्रयोगशाला कार्य, क्लिनिकल ट्रेनिंग, फील्ड प्रैक्टिस और प्रैक्टिकल अनुभव अत्यंत जरूरी है। ऐसे में ऑनलाइन माध्यम से इनकी शिक्षा देना छात्रों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता करने जैसा होगा। आयोग ने कहा है कि हेल्थ और साइंस जैसे कोर्सेज की नींव प्रयोगात्मक शिक्षा पर टिकी होती है, इसलिए इन्हें केवल ऑफलाइन और प्रत्यक्ष शिक्षण पद्धति के जरिए ही पढ़ाया जाएगा।
यूजीसी ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल उन्हीं कोर्सेज को ऑनलाइन चला सकते हैं, जिनकी अनुमति आयोग द्वारा पहले से दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जाएगी। यह फैसला खासतौर पर उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो अब तक ऑनलाइन हेल्थ और साइंस कोर्सेज में दाखिला लेने की सोच रहे थे। अब उन्हें पारंपरिक ऑफलाइन माध्यम से ही इन कोर्सेज की पढ़ाई करनी होगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी का यह निर्णय छात्रों के हित में है, क्योंकि इससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर भी सुनिश्चित होगा। हालांकि, ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते चलन के बीच यह कदम कुछ छात्रों के लिए कठिनाई भी खड़ी कर सकता है, लेकिन लंबे समय में यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता और मानक बनाए रखने के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है।