मधेपुरा: BNMU इंटर्नशिप घोटाले के खुलासे के बाद अधिकारियों में हड़कंप है। जब हमारे संवाददाता ने जवाब मांगा, तो कुलसचिव ने चयन समिति से पल्ला झाड़ लिया। लेकिन DSW ने एक हैरान करने वाला ‘ऑन-रिकॉर्ड’ कबूलनामा दिया: “हमें योग्य कंपनियां नहीं मिलीं, तो मैं क्या करता? क्या प्रक्रिया को रोक देता?”
जी हां, नियम यही कहता है कि योग्य टेंडर न मिलने पर टेंडर रद्द (Re-tender) होता है, छात्रों का भविष्य 50 दिन पुरानी फर्जी कंपनियों को नहीं बेचा जाता।
7 मई का ‘लीपापोती’ नोटिस: लूट को कानूनी जामा कॉलेजों के भारी विरोध के बाद, घबराए विश्वविद्यालय ने 7 मई को एक नया नोटिस निकाला। डैमेज कंट्रोल के लिए फीस की अधिकतम सीमा ₹500 तय कर दी गई। लेकिन अयोग्य टेंडर रद्द करने के बजाय, विश्वविद्यालय अब कॉलेजों पर 5 दिन के भीतर इन्हीं फर्जी कंपनियों के साथ ‘नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प’ पर कानूनी समझौता (MoU) करने का दबाव बना रहा है।
भ्रष्टाचार की दर कम कर देने से वह ‘ईमानदारी’ नहीं बन जाता। ग्रामीण छात्रों से ₹500 वसूलकर 50-दिन पुरानी कंपनी से बेकार का ‘ऑनलाइन’ सर्टिफिकेट दिलाना शिक्षा नहीं, सरेआम वसूली है।