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“कोई भी बच्चा पीछे न छूटे”: बिहार में दिव्यांगता की पहचान के लिए नई पहल शुरू

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​बाल विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, बिहार सरकार ने दिव्यांगता प्रोटोकॉल और दिव्यांगता जांच अनुसूची (DSS) का औपचारिक शुभारंभ किया है। इसका मुख्य उद्देश्य 0 से 6 वर्ष के बच्चों में विकासात्मक विलंब और दिव्यांगता की समय पर पहचान करना है।

​DSS क्या है?
यह एक सरल और मानकीकृत चेकलिस्ट है जिसके माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के विकास से जुड़े 6 प्रमुख क्षेत्रों की निगरानी करेंगी:
1. ​मोटर विकास और शारीरिक गतिविधियाँ।
2. ​भाषा और संचार कौशल।
​ 3. संज्ञानात्मक (मानसिक) विकास।
​ 4. सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार।
​ 5. दृष्टि और श्रवण क्षमता।
​इसके साथ ही एक मजबूत रेफरल प्रणाली भी बनाई गई है, जो आंगनवाड़ी केंद्रों को आशा, एएनएम, RBSK टीम और जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) से जोड़ेगी। इससे सुनिश्चित होगा कि हर बच्चे को समय पर सही इलाज और सहायता मिल सके।

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