आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मंगलवार को साइबर सुरक्षा पर केंद्रित ‘प्रोजेक्ट शील्ड’ वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और आम नागरिकों को ऑनलाइन ठगी, फेक न्यूज और डिजिटल खतरों से बचाव के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की विभागाध्यक्ष मनीषा प्रकाश ने अतिथियों का परिचय कराते हुए किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं के साथ घटित एक साइबर फ्रॉड का अनुभव भी साझा किया, जिससे उपस्थित लोगों को विषय की गंभीरता का एहसास हुआ।
वर्कशॉप में मुख्य वक्ता के रूप में इंडिया टुडे ग्रुप के फैक्ट चेक के एग्जीक्यूटिव एडिटर बाल कृष्ण, यूनिसेफ के अधिकारी बांके बिहारी सरकार और स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रियेश सिन्हा मौजूद रहे। प्रियेश सिन्हा ने अपने अंदाज में बताया कि वे कभी भी एक जैसे पासवर्ड नहीं रखते और पासवर्ड कॉपी में लिखकर सुरक्षित रखते हैं। उनकी हास्यपूर्ण शैली ने कार्यक्रम को हल्के-फुल्के अंदाज में जीवंत कर दिया। बाल कृष्णा और प्रियेश सिन्हा ने साथ मिलकर माइक संभाला और प्रतिभागियों को जागरूक किया। वहीं, एक इंटरएक्टिव क्विज के जरिए कार्यक्रम को रोचक बनाए रखा गया।
यूनिसेफ के बांके बिहारी सरकार ने ‘सी सैम वर्ल्ड’ और साइबर अपराधों पर हालिया आंकड़े साझा किए। CBI की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60 करोड़ से अधिक इंटरनेट यूजर हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या 12 से 29 वर्ष के युवाओं की है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि 18% पीड़ित 14 वर्ष से कम आयु की लड़कियां है।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार निरंजन प्रसाद यादव ने बताया कि बिहार में 44 साइबर थाना संचालित हो रहे हैं, जो साइबर अपराधों की जांच और रोकथाम में सक्रिय हैं। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय में साइबर सुरक्षा विषय पर आधारित कोर्स और जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किए जाने की बात भी साझा की।
वर्कशॉप में साइबर ठगी के कई वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए गए, जिनमें एक दिन में 66 करोड़ रुपये तक की ठगी के मामले शामिल थे। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा है और हर व्यक्ति को अपनी ऑनलाइन पहचान की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए।