भारत में तकनीकी शिक्षा और नवाचार को नया आयाम देने के लिए उत्तर प्रदेश में देश की पहली प्राइवेट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित यूनिवर्सिटी की शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव जिले के बक्सर गांव में इस अत्याधुनिक बहु-विषयक कैंपस का उद्घाटन किया। यह विश्वविद्यालय चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सहयोग से लखनऊ-कानपुर हाईवे पर लगभग 100 एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किया गया है। यहां इंजीनियरिंग, बिजनेस, हेल्थ साइंसेज, लीगल स्टडीज, ह्यूमैनिटीज और लिबरल आर्ट्स जैसे विषयों में स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स संचालित किए जाएंगे, जिनकी पढ़ाई पूरी तरह AI-ऑगमेंटेड यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण मॉडल के जरिए होगी।
इस यूनिवर्सिटी का उद्देश्य सिर्फ डिग्री देना नहीं बल्कि छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकी दक्षता से लैस करना है। इसे भारत के नई शिक्षा नीति (NEP) के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल माना जा रहा है। यहां छात्रों को AI, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा जैसी नई पीढ़ी की तकनीकों में गहन प्रशिक्षण मिलेगा। शिक्षण के प्रत्येक स्तर पर डिजिटल उपकरणों और स्मार्ट लर्निंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे युवा न केवल रोजगार योग्य बनेंगे, बल्कि उद्यमिता की ओर भी अग्रसर हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर ‘AI प्रज्ञा योजना’ की भी घोषणा की। इस योजना के तहत राज्य के 10 लाख से अधिक युवाओं, शिक्षकों, ग्राम प्रधानों, किसानों और सरकारी कर्मचारियों को AI और डिजिटल स्किल्स में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल, गूगल और गुवी जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियों की मदद से चलाए जाएंगे। सरकार ने हर महीने 1.5 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य तय किया है। इससे गांवों तक डिजिटल साक्षरता और तकनीकी जागरूकता का विस्तार होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने AI को राज्य प्रशासन के विविध क्षेत्रों में भी शामिल करना शुरू कर दिया है। सुरक्षा के लिए ‘सेफ सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत 17 नगर निगमों में AI-आधारित कैमरे, फेशियल रिकग्निशन, और SOS अलर्ट सिस्टम लगाए गए हैं। कृषि क्षेत्र में ‘UP-Agris’ नामक विश्व बैंक समर्थित परियोजना के जरिए AI आधारित स्मार्ट सिंचाई, कीट पहचान, फसल रोग निदान और ड्रोन मैपिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे 10 लाख किसान और 10,000 महिला स्वयं सहायता समूह लाभान्वित हो रहे हैं।
AI का उपयोग जेल और खनन प्रशासन में भी किया जा रहा है। राज्य की 70 जेलों में ‘Jarvis’ नामक एक AI आधारित निगरानी प्रणाली लगाई गई है, जिससे कैदियों पर 24×7 नजर रखी जा सकती है। खनन विभाग ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए IoT और AI-आधारित उपकरणों को अपनाया है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। यह तकनीकी विस्तार प्रदेश प्रशासन को और अधिक दक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी बना रहा है।
उत्तर प्रदेश में AI आधारित इस नई यूनिवर्सिटी और व्यापक प्रशिक्षण योजनाओं की शुरुआत से यह साफ है कि राज्य अब शिक्षा और तकनीकी विकास के मामले में देशभर में नेतृत्व करने की स्थिति में आ चुका है। यह पहल सिर्फ युवाओं को भविष्य के लिए तैयार नहीं कर रही, बल्कि पूरे प्रदेश को तकनीक की नई दिशा में आगे बढ़ा रही है। इससे ग्रामीण भारत, किसान वर्ग, शिक्षकों और सरकारी तंत्र में तकनीकी जागरूकता और दक्षता का समावेश होगा, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को डिजिटल क्रांति का नेतृत्वकर्ता बना सकता है।