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Special Report

महा-पर्दाफाश: बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय (BNMU) में NEP 2020 के नाम पर करोड़ों का इंटर्नशिप घोटाला- Special Report

Special Report – बीएनएमयू (BNMU) मधेपुरा में इंटर्नशिप महाघोटाले का सच। कैसे 3 साल के अनुभव वाले नियम को दरकिनार कर 50 दिन पुरानी फर्जी कंपनियों को दिए गए करोड़ों के ठेके।

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INTERNSHIP SCAM EXPOSED

संस्थागत भ्रष्टाचार और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़: बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय में इंटर्नशिप एम्पैनलमेंट (Empanelment) घोटाले का महा-पर्दाफाश – Campus Reporter Special

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लागू होने के बाद भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में कई संरचनात्मक और क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का सबसे प्रमुख हिस्सा कौशल विकास और इंटर्नशिप को एक अनिवार्य शैक्षणिक घटक बनाना है, ताकि छात्रों को केवल किताबी ज्ञान न मिले, बल्कि उन्हें वास्तविक कार्यक्षेत्र (Industry) का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो सके। इसी राष्ट्रीय दिशा-निर्देश का पालन करते हुए बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय (BNMU), मधेपुरा ने स्नातक सत्र 2023-27 के 5वें सेमेस्टर के छात्रों के लिए इंटर्नशिप सेवा प्रदाताओं (Internship Service Providers – ISPs) को सूचीबद्ध (empanel) करने की एक व्यापक प्रक्रिया शुरू की । हालांकि, इस पूरी चयन प्रक्रिया, जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के सार्वजनिक आंकड़ों की जब गहराई से फोरेंसिक पड़ताल की गई, तो एक सुनियोजित, संस्थागत भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का चौंकाने वाला मामला सामने आया।

विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक निविदा (Request for Proposal – RFP) में स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी गई थी कि इंटर्नशिप एजेंसियों के पास कम से कम तीन साल का अनुभव होना अनिवार्य है । इसके बावजूद, विश्वविद्यालय की सर्वोच्च मूल्यांकन और चयन समिति ने ऐसी कई निजी कॉर्पोरेट कंपनियों को इंटर्नशिप का करोड़ों का ठेका दे दिया, जो इस बुनियादी और अनिवार्य योग्यता को बिल्कुल भी पूरा नहीं करती हैं । सबसे अधिक हैरानी और जांच का विषय यह है कि चयनित एजेंसियों में से एक का निर्माण निविदा (RFP) जारी होने से मात्र 50 दिन पहले ही हुआ था

कुलपति, कुलसचिव, छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW), प्रॉक्टर और परीक्षा नियंत्रक जैसे विश्वविद्यालय के सर्वोच्च और सबसे अनुभवी शिक्षाविदों से सजी इस चयन समिति ने एक ऐसी त्वरित और संदिग्ध प्रक्रिया को अंजाम दिया, जिसके तहत हजारों छात्रों के भविष्य—और उनकी जेब से निकलने वाले लाखों रुपये की फीस—को नई, अनुभवहीन और कानूनी रूप से अयोग्य कंपनियों के हवाले कर दिया गया । यह विस्तृत और खोजी रिपोर्ट इस पूरी चयन प्रक्रिया में की गई प्रशासनिक, वैधानिक और वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिलेवार पर्दाफाश करती है और बताती है कि कैसे एक अच्छी राष्ट्रीय नीति को स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया।


नीतियां, नियम और शैक्षणिक ढांचा: RFP का गहन विश्लेषण

चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (CBCS) के तहत तैयार किए गए चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में 4थे सेमेस्टर के बाद या 5वें सेमेस्टर के दौरान चार क्रेडिट (4 Credits) की अनिवार्य इंटर्नशिप का प्रावधान किया गया है । बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, कला, विज्ञान और वाणिज्य (Arts, Science, and Commerce) के सभी छात्रों को 60 से 120 घंटे का ‘ऑन-द-जॉब’ (On-the-job) प्रशिक्षण पूरा करना अनिवार्य है । इस इंटर्नशिप का मुख्य उद्देश्य छात्रों की रोजगार क्षमता (employability) को बढ़ाना, अंग्रेजी संचार (English communication), सॉफ्ट स्किल्स, व्यक्तित्व विकास (Personality Development) और बेसिक आईटी डोमेन में उन्हें दक्ष बनाना है

इस विशाल शैक्षणिक कार्य को धरातल पर उतारने के लिए, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 13 अप्रैल 2026 को कुलसचिव के हस्ताक्षर से एक ‘रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल’ (RFP) जारी किया, जिसमें योग्य और अनुभवी एजेंसियों से आवेदन मांगे गए । इसके तुरंत बाद, 2 मई 2026 को माननीय कुलपति के सीधे आदेश से, इंटर्नशिप प्रकोष्ठ (Internship Cell) ने एक अधिसूचना (ज्ञापांक-जी.एस.-050-627/26-557/26) जारी कर 5 एजेंसियों को अंतिम रूप से सूचीबद्ध कर दिया । सभी अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों (Constituent and Affiliated Colleges) को कड़े निर्देश दिए गए कि वे छात्रों की इंटर्नशिप के लिए इन्हीं चयनित एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करें


निविदा की समय-सीमा: सुनियोजित साजिश के संकेत (कब और कैसे)

किसी भी सरकारी निविदा या RFP की समय-सीमा इस बात का प्रमाण होती है कि प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई गई समय-सीमा अपने आप में कई गहरे संदेह पैदा करती है।

कुलसचिव द्वारा हस्ताक्षरित RFP 13 अप्रैल 2026 को जारी किया गया । RFP के खंड 7 (“Event Description Dates”) के अनुसार, एजेंसियों को अपने विस्तृत प्रस्ताव छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW) के कार्यालय में 18 अप्रैल 2026 की शाम 5 बजे तक जमा करने थे । इसका सीधा अर्थ है कि देशभर की एजेंसियों को इस जटिल प्रक्रिया में भाग लेने के लिए मात्र पांच (5) दिन का समय दिया गया।

इन पांच दिनों के भीतर, एजेंसियों को अपने निगमन प्रमाणपत्र (Certificate of Incorporation), MSME पंजीकरण, GST, PAN, पिछले अनुभवों का विस्तृत प्रोफ़ाइल, इंटर्नशिप प्रमाणपत्रों के प्रारूप और सबसे महत्वपूर्ण—पुरानी इंटर्नशिप के फीडबैक और प्रशंसापत्र जुटाकर जमा करने थे । इसके ठीक तीन दिन बाद, 21 अप्रैल 2026 को दोपहर 12:30 बजे से मूल्यांकन के लिए पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PowerPoint Presentation) का समय तय कर दिया गया

सरकारी खरीद और निविदा के सामान्य नियमों के अनुसार, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 21 से 30 दिनों का समय दिया जाता है। मात्र 5 दिन की समय-सीमा इस बात का बहुत मजबूत संकेत देती है कि इस निविदा के असली लाभार्थियों (beneficiaries) को पहले से ही इस प्रक्रिया की जानकारी दे दी गई थी, ताकि वे अपने दस्तावेज़ तैयार रख सकें, जबकि बाहर की असली और अनुभवी शिक्षा कंपनियों को इस दौड़ से योजनाबद्ध तरीके से बाहर कर दिया गया।


योग्यता के मापदंड बनाम जमीनी हकीकत: नियमों की खुली अनदेखी

किसी भी निविदा की शुचिता उसके नियमों के सख्ती से पालन पर निर्भर करती है, विशेषकर तब जब मामला हजारों छात्रों के भविष्य और शिक्षा का हो। RFP के खंड 5 (“योग्यता मानदंड” – Qualification Criteria) में स्पष्ट और सख्त शर्तें रखी गई थीं ताकि केवल योग्य संस्थाएं ही यह जिम्मेदारी संभालें :

  1. तीन वर्ष का अनुभव: खंड 5(i) में अत्यंत स्पष्ट शब्दों में लिखा गया है, “फर्म/संस्थान/एजेंसी के पास इंटर्नशिप सेवाएं प्रदान करने का कम से कम 3 वर्षों का अनुभव होना चाहिए और इसके दस्तावेजी साक्ष्य (documentary evidence) प्रस्तुत करने होंगे” । यह नियम अनुभवहीन कंपनियों को बाहर रखने का सबसे बड़ा हथियार था।

  2. पेशेवरों की पर्याप्त संख्या: खंड 5(ii) के तहत एजेंसियों के पास अनुभवी पेशेवरों (experienced professionals) का एक मजबूत समूह होना अनिवार्य था

  3. मानक संचालन प्रक्रिया (SOP): खंड 5(iii) के तहत इंटर्नशिप के प्रबंधन के लिए एक स्पष्ट SOP होना अनिवार्य बताया गया था

  4. वैधानिक पंजीकरण: खंड 5(iv) में MCA से निगमन प्रमाणपत्र (Certificate of Incorporation), PAN और सेवा कर/GST पंजीकरण की प्रतियां जमा करना आवश्यक बताया गया था

इसके अतिरिक्त, खंड 6(F) के तहत पुरानी इंटर्नशिप के फीडबैक (Feedback) और प्रशंसापत्र सौंपना अनिवार्य था

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विश्वविद्यालय ने RFP के खंड 9 में “भ्रष्ट या धोखाधड़ीपूर्ण आचरण” (Corrupt or Fraudulent Practices) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया था । इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि तथ्यों को छिपाना, गलत जानकारी देना या निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अपूर्ण तथ्य प्रस्तुत करना ‘धोखाधड़ी’ मानी जाएगी, और ऐसा करने वाली एजेंसी का प्रस्ताव तुरंत खारिज कर उसे ब्लैकलिस्ट (Blacklist) किया जा सकता है

साक्ष्यों की पड़ताल: अयोग्य एजेंसियों का पर्दाफाश

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs – MCA) के सार्वजनिक डाटा बेस से जो आधिकारिक जानकारी सामने आई है, वह इस बात का अकाट्य और चौंकाने वाला प्रमाण है कि चयन समिति ने अपने ही द्वारा बनाए गए RFP नियमों की बेरहमी से धज्जियां उड़ा दीं। सूचीबद्ध की गई पांच एजेंसियों में से तीन स्पष्ट रूप से 3-वर्ष के अनुभव के अनिवार्य नियम का सीधा और खुला उल्लंघन करती हैं

  1. स्नातक कार्यक्रम के अंतर्गत इंटर्नशिप सेवाएं प्रदान करने हेतु प्रस्ताव आमंत्रण (आरएफपी) की सूचना – दिनांक: 13/04/2026  Link

    https://bnmu.ac.in/files/announcement/Notice%20Inviting%20Request%20for%20Proposal%20(RFP)%20for%20Providing%20Internship%20Services%20under%20Undergraduate%20Programme7o8e4.pdf

  2. इंटर्नशिप सेवाओं के लिए आवेदन हेतु आवेदन प्रस्तुत करने, मूल्यांकन और प्रस्तुति की सूचना दिनांक: 20/4/2026 Link

    https://bnmu.ac.in/files/announcement/RFP%20Submission%20Evaluation%20and%20Presentation%20Notice%20%E2%80%93%20Internship%20ServicesVYXUe.jpg

  3. चयनित कंपनियाँ: पांचवें सेमेस्टर की इंटर्नशिप और इंटर्नशिप सेवा प्रदाताओं के पैनल में शामिल होने संबंधी सूचना दिनांक: 3/5/2026
    Link

    https://bnmu.ac.in/files/announcement/Notice%20regarding%205th%20Semester%20Internship%20and%20Empanelment%20of%20Internship%20Service%20Providers24kxJ.pdf

चयनित एजेंसी का नामकॉर्पोरेट पहचान संख्या (CIN)निदेशक (Directors)निगमन की तिथि (Incorporation Date)RFP की समय-सीमा (18 अप्रैल 2026) पर कंपनी की आयुक्या 3-वर्ष का अनुभव नियम पूरा हुआ?
Selfcode Academy Pvt. Ltd.U85499UP2026PTC244861प्रशांत मिश्रा, विजय प्रकाश25 फरवरी, 2026लगभग 50 दिननहीं
Ezyintern SDP Technology Pvt. Ltd.U85500BR2024PTC072653ओम राज, रौशन कुमार महतो14 दिसंबर, 2024लगभग 1 साल 4 महीनेनहीं
Coherent Strategia Advizo (OPC) Pvt. Ltd.U70200BR2024OPC067224प्रवीण कुमार मिश्रा18 जनवरी, 2024लगभग 2 साल 3 महीनेनहीं
AIIES Educational Services Pvt. Ltd.U80300BR2022PTC057906सोहित कुमार, अमन कुमार11 मई, 2022लगभग 3 साल 11 महीनेहां
MGM Foundation (NGO)N/A (NGO)N/A201412 सालहां

कंपनी 1: सेल्फकोड अकैडमी (Selfcode Academy) का “काल्पनिक” अनुभव

इस पूरी निविदा प्रक्रिया का सबसे बड़ा और शर्मनाक फर्जीवाड़ा उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित ‘सेल्फकोड अकैडमी प्राइवेट लिमिटेड’ के चयन में देखा जा सकता है । प्रशांत मिश्रा और विजय प्रकाश के निर्देशन वाली यह कंपनी (CIN: U85499UP2026PTC244861) 25 फरवरी 2026 को MCA के तहत पंजीकृत हुई थी

जब 18 अप्रैल 2026 को RFP जमा करने की अंतिम तिथि समाप्त हुई, तब इस कंपनी का जन्म हुए बमुश्किल 50 दिन ही हुए थे । तर्क, विज्ञान और समय के सामान्य नियमों के अनुसार, जो कंपनी 50 दिन पहले बनी हो, वह RFP के खंड 5(i) के तहत “3 वर्षों के इंटर्नशिप अनुभव का दस्तावेजी साक्ष्य” कैसे प्रस्तुत कर सकती है? । यह एक पूर्णतः असंभव बात है।

इस कंपनी ने तकनीकी मूल्यांकन पास करने के लिए खंड 6(F) के तहत पुरानी इंटर्नशिप के फीडबैक कैसे जमा किए? । इसका सीधा और स्पष्ट अर्थ है कि या तो इस 50 दिन पुरानी कंपनी ने पूरी तरह से फर्जी दस्तावेज़ जमा किए (जिनकी समिति ने कोई जांच नहीं की), या फिर चयन समिति ने जानबूझकर सारे नियम ताक पर रखकर, एक पूर्व-निर्धारित योजना के तहत इस कंपनी को लाभ पहुंचाया। दोनों ही स्थितियों में, RFP के खंड 9 (धोखाधड़ीपूर्ण आचरण) का सीधा उल्लंघन हुआ है, जिस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी तरह से आंखें मूंद लीं । 

selfcode-MCA screenshot

Screenshot of MCA website showing details of selfcode academy

कंपनी पंजीकरण विवरण:
  1. SELFCODE ACADEMY PRIVATE LIMITED – Zixin India, accessed May 3, 2026, https://zixinindia.com/company_portfolios/company/selfcode-academy-private-limited-cin-U85499UP2026PTC244861
RFP मानकों को पूरा ना करने के बावजूद इसस कंपनी को प्रेज़न्टैशन के लिए आमंत्रित करना साफ साफ दिखाता है के ये विश्वविद्यालय की साँठ गांठ से यह कंपनी चयन प्रक्रिया का हिस्सा बनी है 

कंपनी 2: ईज़ीइंटर्न एसडीपी टेक्नोलॉजी (Ezyintern SDP Technology)

बिहार के दरभंगा जिले के सिरनिया पते पर पंजीकृत ‘ईज़ीइंटर्न एसडीपी टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड’ (CIN: U85500BR2024PTC072653) का निगमन 14 दिसंबर 2024 को ओम राज और रौशन कुमार महतो द्वारा किया गया था । महज 10,000 रुपये की पेड-अप कैपिटल (Paid-up capital) वाली यह अत्यंत सूक्ष्म कंपनी RFP जारी होने के समय बमुश्किल 16 महीने पुरानी थी

36 महीने (3 साल) के अनुभव के अनिवार्य मानदंड से 20 महीने पीछे होने के बावजूद, विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों ने इस कंपनी को तकनीकी रूप से योग्य मान लिया और हजारों छात्रों के व्यक्तित्व विकास और संचार कौशल (Communication skills) निखारने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी इसे सौंप दी

ezyintern-MCA screenshot

Screenshot of MCA website showing details of Ezyintern SDP Technology

कंपनी पंजीकरण विवरण
  1. Ezyintern Sdp Technology Financials | Company Details – Tofler, accessed May 3, 2026, https://www.tofler.in/ezyintern-sdp-technology-private-limited/company/U85500BR2024PTC072653
  2. EZYINTERN SDP TECHNOLOGY PRIVATE LIMITED | CIN U85500BR2024PTC072653 Company Details – IndiaFilings, accessed May 3, 2026, https://www.indiafilings.com/search/ezyintern-sdp-technology-private-limited-cin-U85500BR2024PTC072653

कंपनी 3: कोहेरेंट स्ट्रेटेजिआ एडवाइजो (Coherent Strategia Advizo)

इसी तरह, पटना की ‘कोहेरेंट स्ट्रेटेजिआ एडवाइजो (OPC) प्राइवेट लिमिटेड’, जिसके निदेशक प्रवीण कुमार मिश्रा हैं, 18 जनवरी 2024 को निगमित हुई थी । यह वन पर्सन कंपनी (One Person Company – OPC) निविदा के समय लगभग सवा दो साल (27 महीने) पुरानी थी । यह कंपनी भी 3 साल के कड़े नियम को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही, फिर भी मूल्यांकन समिति ने इसे हरी झंडी दे दी । एक OPC कंपनी, जिसमें नियंत्रण एक ही व्यक्ति के पास होता है, एक साथ कई महाविद्यालयों के हजारों छात्रों का मूल्यांकन (CCE) कैसे करेगी, यह अपने आप में एक बड़ा ढांचागत सवाल है

Screenshot of MCA website Coherent Strategia Advizo

Screenshot of MCA website showing details of Coherent Strategia Advizo

कंपनी पंजीकरण विवरण
  1. Coherent Strategia Advizo (Opc) Financials | Company Details – Tofler, accessed May 3, 2026, https://www.tofler.in/coherent-strategia-advizo-opc-private-limited/company/U70200BR2024OPC067224
  2. COHERENT STRATEGIA ADVIZO OPC PRIVATE LIMITED | CIN u70200br2024opc067224 Company Details – IndiaFilings, accessed May 3, 2026, https://www.indiafilings.com/search/coherent-strategia-advizo-opc-private-limited-cin-U70200BR2024OPC067224

चयन समिति की भूमिका: लापरवाही या सुनियोजित साठगांठ?

नियमों की इतनी बड़ी और खुली अनदेखी को महज एक लिपिकीय त्रुटि (clerical error) या संयोग नहीं माना जा सकता। राज्य विश्वविद्यालयों में निविदाओं के मूल्यांकन के लिए एक बहु-स्तरीय और जटिल जांच प्रक्रिया होती है जिसे इस प्रकार की खामियों को रोकने के लिए ही बनाया जाता है। बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय की यह चयन समिति किसी जूनियर कर्मचारियों या क्लर्कों की नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सर्वोच्च पदों पर बैठे वरिष्ठ शिक्षाविदों की थी:

  1. कुलपति प्रो. (डॉ.) बिमलेंदु शेखर झा: विश्वविद्यालय के सर्वोच्च कार्यकारी और शैक्षणिक अधिकारी के रूप में, सभी समितियों के निर्णयों, वित्तीय मंजूरियों और नीतियों को लागू करने की अंतिम जिम्मेदारी कुलपति की ही होती है । 2 मई 2026 की वह विवादास्पद अधिसूचना, जिसमें कॉलेजों को इन कंपनियों से MoU करने को कहा गया, स्पष्ट रूप से “माननीय कुलपति महोदय के आदेश से” जारी की गई थी

  2. कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह: राज्य के कुलाधिपति (राज्यपाल) द्वारा नियुक्त कुलसचिव, विश्वविद्यालय के सभी कानूनी दस्तावेजों, निविदाओं और वैधानिक नियमों का संरक्षक होता है । 13 अप्रैल 2026 को जारी किया गया मूल RFP, जिसमें 3 साल के अनुभव की अनिवार्य शर्त लिखी थी, कुलसचिव के ही हस्ताक्षर से निकला था

  3. छात्र कल्याण अध्यक्ष (DSW) प्रो. अशोक कुमार: RFP दस्तावेजों को सीधे DSW कार्यालय में ही जमा करने का निर्देश था । और सबसे महत्वपूर्ण बात, अंतिम सूची जारी करने वाले इंटर्नशिप प्रकोष्ठ के संयोजक (Convenor) के तौर पर 2 मई की अधिसूचना पर DSW के ही हस्ताक्षर मौजूद हैं

  4. प्रॉक्टर डॉ. इम्तियाज अंजुम: विश्वविद्यालय में अनुशासन, संस्थागत अखंडता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाले प्रॉक्टर भी इस महत्वपूर्ण चयन समिति का एक अभिन्न हिस्सा थे । उनका काम इस प्रकार की ढांचागत अनियमितताओं को रोकना था, लेकिन वे भी मूकदर्शक बने रहे।

  5. परीक्षा नियंत्रक (CE) डॉ. शंकर कुमार मिश्रा / डॉ. अरुण कुमार झा: चूँकि इस इंटर्नशिप के 4 क्रेडिट सीधे छात्रों की डिग्री, परीक्षा और रिजल्ट से जुड़ने हैं, इसलिए परीक्षा नियंत्रक भी इस मूल्यांकन समिति में मौजूद थे । यदि इंटर्नशिप करवाने वाली एजेंसी ही अनुभवहीन और फर्जी है, तो उसके द्वारा दिए गए ग्रेड (Grades) और 4 क्रेडिट की शैक्षणिक वैधता स्वतः ही शून्य हो जाती है। इसके अलावा नोडल अफसर (इंटर्नशिप) एस.के. मिश्रा की भूमिका भी इस प्रक्रिया में अहम रही है

दशकों का प्रशासनिक अनुभव रखने वाले और कई डॉक्टरेट (Ph.D.) की उपाधियों से सुशोभित इन शीर्ष अधिकारियों की एक पूरी समिति 3 साल के अनुभव के इतने सख्त नियम के बावजूद 50 दिन पुरानी कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में कैसे पास कर सकती है? निगमन प्रमाणपत्र (Certificate of Incorporation) की जांच MCA की सार्वजनिक वेबसाइट पर करने में बमुश्किल 2 से 3 मिनट का समय लगता है । इस अत्यंत बुनियादी जांच (Due diligence) का ना होना इस बात की ओर बहुत ही मजबूत और स्पष्ट इशारा करता है कि PowerPoint प्रेजेंटेशन और तकनीकी मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया महज एक दिखावा (Eye-wash) थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य पहले से तय की गई अनुभवहीन कंपनियों को करोड़ों का टेंडर दिलाना था।

अपडेट: 09/05/2026 – हमारी रिपोर्ट के दौरान हमारे संवाददाता ने इन चीजों की स्पष्टता के लिए सबसे पहले कुलसचिव से संपर्क किया, जिनके हस्ताक्षर से 13 अप्रैल 2026 को मूल निविदा (RFP) जारी की गई थी । लेकिन उन्होंने इस पूरे विवाद से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया। कुलसचिव ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इंटर्नशिप प्रदाताओं (ISPs) की चयन समिति का हिस्सा नहीं हैं

इसके बाद हरे रिपोर्टर ने DSW से बात की और इसस मामले में जानकारी प्राप्त की तो DSW ने अपनी सफाई में कहा: “हमें योग्य कंपनियां नहीं मिलीं, तो प्रेज़न्टैशन के आधार पे हुमने कॉम्पनियों का चयन कर लिया | 


आर्थिक निहितार्थ: छात्रों के पैसों की योजनाबद्ध बंदरबांट?

इन अयोग्य एजेंसियों का चयन सिर्फ एक प्रशासनिक या तकनीकी गलती नहीं है; इसका सीधा, तत्काल और भारी असर 2023-27 बैच के हजारों छात्रों की जेब पर पड़ेगा। 2 मई 2026 की अधिसूचना में बड़ी चतुराई से एक ऐसा रास्ता निकाला गया है, जो इन कंपनियों को आर्थिक लाभ पहुंचाता है।

अधिसूचना में महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे पहले अपने आस-पास के कृषि विश्वविद्यालय, अनुसंधान केंद्रों, अस्पतालों या उद्योग धंधों से “शुल्क रहित” (फ्री) इंटर्नशिप के लिए MoU करें । लेकिन, इस पंक्ति के तुरंत बाद एक बहुत ही रणनीतिक शर्त (caveat) जोड़ी गई है: यदि नामांकित छात्रों के भारी अनुपात में इन फ्री इंटर्नशिप के अवसरों की “अनुपलब्धता/अभाव” हो, तो महाविद्यालयों को हर हाल में सूचीबद्ध (empanelled) की गई 5 संस्थाओं से ही MoU करना होगा

यही वह छिपी हुई शर्त है जो पूरे खेल को बदल देती है। बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय के अंतर्गत मधेपुरा, सहरसा और आसपास के ग्रामीण जिलों में ऐसा कोई बड़ा औद्योगिक या संस्थागत इकोसिस्टम (Ecosystem) मौजूद ही नहीं है जो 2023-27 बैच के हजारों स्नातक छात्रों को एक साथ फ्री इंटर्नशिप दे सके। ऐसे में, “कृत्रिम कमी” (Artificial Scarcity) पैदा होना तय है, और महाविद्यालयों व छात्रों के पास मजबूरी में इन्हीं पांच सूचीबद्ध एजेंसियों के पास जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।

दस्तावेज़ों और प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इन निजी कंपनियों (सेल्फकोड अकैडमी, कोहेरेंट स्ट्रेटेजिआ, ईज़ीइंटर्न और AIIES) द्वारा प्रति छात्र 400 से 600 रुपये का अनिवार्य शुल्क लिया जाएगा, जबकि NGO (MGM Foundation) द्वारा 700 रुपये लिए जाएंगे

यदि एक रूढ़िवादी अनुमान (conservative estimate) भी लगाया जाए और माना जाए कि विश्वविद्यालय के मात्र 10,000 छात्र भी इस बुनियादी ढांचे की कमी के कारण मजबूरी में इन एजेंसियों की सशुल्क (Paid) इंटर्नशिप लेते हैं, तो यह सीधे तौर पर 40 लाख से 70 लाख रुपये (INR 4,000,000 – 7,000,000) का कारोबार बन जाता है। अनुभवहीन और 50 दिन पुरानी कंपनियों को तीन साल के अनिवार्य नियम से छूट देकर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने असल में इन कंपनियों के लिए एक ऐसा एकाधिकार वाला “कैप्टिव मार्केट” (Captive Market) तैयार कर दिया है, जहाँ छात्रों की मेहनत की कमाई सीधे इन नव-निर्मित प्राइवेट फर्मों के बैंक खातों में जाएगी। असली और अनुभवी शिक्षा प्रदाताओं को बाहर रखकर, एक दूरदर्शी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को छात्रों के धन की उगाही के एक व्यवस्थित तंत्र में बदल दिया गया है।

नीतिगत निहितार्थ, निष्कर्ष और जवाबदेही

बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय में इंटर्नशिप एजेंसियों का यह चयन सरकारी खरीद और निविदाओं में होने वाले सुनियोजित संस्थागत भ्रष्टाचार का एक अत्यंत उत्कृष्ट और निंदनीय उदाहरण है। उपलब्ध सभी दस्तावेजी सबूत इस बात की स्पष्ट पुष्टि करते हैं कि पारदर्शिता, निष्पक्ष बाजार प्रतिस्पर्धा और संस्थागत नियमों के मूल सिद्धांतों को भीतर से ही पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, ताकि कुछ विशेष, नव-निगमित निजी संस्थाओं को अनुचित और अवैध आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके।

इस प्रशासनिक कदाचार के परिणाम बहुत गहरे और दोहरे हैं। पहला, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का मूल शैक्षणिक उद्देश्य ही गंभीर रूप से खतरे में पड़ गया है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले जो छात्र अपने महत्वपूर्ण कौशल विकास के लिए अपनी जेब से पैसा दे रहे हैं, उन्हें ऐसी कंपनियों के भरोसे छोड़ दिया गया है जिनके पास शैक्षणिक या संस्थागत काम करने का कोई पिछला इतिहास ही नहीं है। इससे छात्रों के भविष्य, उनकी रोजगार क्षमता (employability) और विश्वविद्यालय द्वारा दिए जाने वाले 4 क्रेडिट की गुणवत्ता पर बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लग जाता है

दूसरा, यह घटना विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और पदानुक्रमिक ढांचे में मौजूद एक गहरे और व्यवस्थित भ्रष्टाचार को उजागर करती है, जहां जांच और नियंत्रण के सारे तंत्र—कुलसचिव से लेकर कुलपति तक—पूरी तरह और एक साथ विफल हो गए।

RFP के खंड 5(i) का इतना बड़ा और सत्यापन योग्य उल्लंघन ‘सेल्फकोड अकैडमी’, ‘ईज़ीइंटर्न एसडीपी टेक्नोलॉजी’ और ‘कोहेरेंट स्ट्रेटेजिआ’ के चयन को कानूनी रूप से पूरी तरह अवैध और शून्य बनाता है । विश्वविद्यालय के अपने ही RFP के खंड 9 के सख्त दिशानिर्देशों के अनुसार, निविदा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए गलत या भ्रामक जानकारी देना एक “धोखाधड़ीपूर्ण आचरण” (Fraudulent Practice) है, जिसकी सजा प्रस्ताव को तुरंत रद्द करना और दोषी कंपनी को ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करना है

इसके बावजूद, इन अयोग्य और संदिग्ध एजेंसियों को विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन में न केवल पास किया गया, बल्कि हजारों छात्रों का भविष्य उनके हाथों में सौंप दिया गया। यह अत्यंत गंभीर स्थिति इस पूरी चयन प्रक्रिया की एक स्वतंत्र, उच्च स्तरीय न्यायिक (Judicial) या निगरानी (Vigilance) जांच की तत्काल मांग करती है। तकनीकी मूल्यांकन समिति द्वारा दिए गए अंकों (scorecards) का फोरेंसिक ऑडिट होना चाहिए और जब तक इन सभी कंपनियों की वैधानिक योग्यताओं, वित्तीय पृष्ठभूमि और शैक्षणिक क्षमता की सार्वजनिक और पारदर्शी जांच नहीं हो जाती, तब तक इन सभी MoU पर तत्काल प्रभाव से रोक लगनी चाहिए। छात्रों के भविष्य को भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने से रोकने के लिए इस पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करना अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय और शैक्षणिक आवश्यकता है।

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