Bihar
पटना के छात्रों का सफर: शिक्षा नगरी की सड़कों पर गड्ढों और जलजमाव का आतंक
Published
8 months agoon

पटना को “शिक्षा नगरी” कहा जाता है। यहाँ के कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कोचिंग सेंटर ने हजारों छात्रों का भविष्य गढ़ा है। लेकिन विडंबना यह है कि जिन रास्तों से होकर छात्र शिक्षा लेने जाते हैं, वही सड़कें उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।
गली से क्लास तक का संघर्ष
पटना विश्वविद्यालय से लेकर पीएमसीएच तक का इलाका हर रोज हजारों छात्रों और मरीजों की आवाजाही का गवाह बनता है। लेकिन अशोक राजपथ की हालत यह है कि ई-रिक्शा और ऑटो गड्ढों में फंसकर पलट जाते हैं। पीएमसीएच के आसपास जलजमाव ने स्थिति और भयावह बना दी है। एंबुलेंस तक को मरीजों को मरीन ड्राइव घुमाकर ले जाना पड़ता है।
कंकड़बाग, जो पटना का सबसे बड़ा रिहायशी और शिक्षा केंद्र माना जाता है, वहाँ की गलियों में बारिश के बाद हालात ऐसे हो जाते हैं कि छात्र समय पर कोचिंग तक नहीं पहुँच पाते। कई जगहों पर तो पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
बोरिंग रोड और नागेश्वर कॉलोनी: कोचिंग हब की हकीकत
बोरिंग रोड और नागेश्वर कॉलोनी पटना का सबसे बड़ा कोचिंग हब हैं। यहाँ बिहार और देशभर से छात्र तैयारी करने आते हैं। लेकिन इन सड़कों की हालत देखकर कोई विश्वास ही नहीं करेगा कि यह बिहार की राजधानी का इलाका है। सड़क किनारे जलजमाव, गड्ढे और जाम छात्रों की दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं।
छात्र कहते हैं कि समय और ऊर्जा का बड़ा हिस्सा सड़क की बदहाली में बर्बाद हो जाता है। कोचिंग या यूनिवर्सिटी तक पहुँचने में जितना वक्त लगता है, उससे आधा वक्त तो ट्रैफिक जाम और खराब सड़कों से लड़ने में खर्च हो जाता है।
शिक्षा पर असर
शहर में जगह-जगह कोचिंग, कॉलेज और यूनिवर्सिटियाँ हैं—चाहे वह कंकड़बाग हो, बोरिंग रोड हो या अशोक राजपथ। लेकिन यहाँ की सड़कें शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर डाल रही हैं। छात्र देर से क्लास पहुँचते हैं, परीक्षाओं में समय पर नहीं पहुँच पाते और एंबुलेंस जाम में फँसी रहती हैं।
पटना को शिक्षा और राजनीति की राजधानी कहा जाता है, लेकिन यहाँ की सड़कों की बदहाली इस पहचान को शर्मसार करती है। चमचमाते फ्लायओवर और मरीन ड्राइव भले ही “विकास” की तस्वीर पेश करें, मगर गली-मोहल्लों और शिक्षा केंद्रों से जुड़ी सड़कों की हालत अब भी वैसी ही है जैसी दशकों पहले थी। जब तक छात्रों और आम जनता के हित को ध्यान में रखकर सड़कें नहीं बनाई जाएँगी, तब तक पटना में विकास का सपना अधूरा ही रहेगा।
Madhuyanka Raj is a poet, writer, and journalist whose work bridges the worlds of literature and contemporary reportage. With a voice rooted in both lyrical introspection and investigative clarity, Madhuyanka has published poetry in acclaimed literary journals and contributed features, essays, and reportage to a range of national and international publications. Their writing explores themes of identity, social justice, and the human condition, often blending narrative depth with poetic nuance. Madhuyanka is passionate about telling stories that challenge, illuminate, and inspire. When not chasing a deadline or crafting verse, they often speak at literary festivals and lead workshops on creative writing and journalistic integrity.
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